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कॉलेज चयन करने में इंटरनेट की रहती है 33 फीसदी भूमिका
कॉलेज चयन करने में इंटरनेट की भूमिका

छात्र जब स्कूल से कॉलेज में प्रवेश लेते हैं 35 फीसदी छात्रों के अनुसार अभिभावक कॉलेज चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि इसमें इंटरनेट की भूमिका 33 फीसदी होती है. 46 फीसदी शिक्षकों का मानना है कि छात्र और अभिभावक करियर संबंधी फैसलों को लेकर बेहद तनाव में रहते हैं. करीब 98 फीसदी विश्वविद्यालयों के अनुसार स्कूल स्तर पर ज्यादा जानकारी और बेहतर काउन्सलिंग छात्रों को युनिवर्सिटी/ कॉलेज के लिए बेहतर तैयार कर सकती है. करियर और कॉलेज काउन्सलिंग पर आधारित एक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई.
आईसी3 (इंटरनेशल करियर एंड कॉलेज काउन्सलिंग) सर्वेक्षण के निष्कर्षो में बताया गया कि 56 फीसदी विश्वविद्यालयों के अनुसार हाई स्कूल छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वहीं, 58 फीसदी विश्वविद्यालय हाई स्कूलों के साथ ‘सम्बन्ध निर्माण’ जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं. वहीं, 41 फीसदी विश्वविद्यालयों ने बताया कि वे विशेष रूप से ‘विद्यार्थिया की भर्ती’ पर ध्यान केन्द्रित करते हैं.

इस सर्वेक्षण में कहा गया कि हाल ही में विभिन्न देशों में हुए राजनीतिक बदलाव के बावजूद 31 फीसदी विश्वविद्यालयों में इस साल अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या में मामूली सी वृद्धि हुई है. इनमें से 45 फीसदी का मानना है कि ये आंकड़े पिछले साल के बराबर है.

आईसी3 सम्मेलन के अध्यक्ष, केआईसी युनिव असिस्ट के अध्यक्ष एवं चीफ मेंटर तथा पूर्व हाई स्कूल कॉलेज काउन्सलर गणेश कोहली ने यहां आयोजित इंटरनेशल करियर एंड कॉलेज काउन्सलिंग सम्मेलन के दौरान कहा, “सर्वेक्षण से पता चला है कि सही उम्र में सही परामर्श/काउन्सलिंग के अभाव के चलते भारतीय विद्यार्थियों को विदेशी विद्यार्थियों की तुलना में कम प्राथमिकता मिलती है. हमें भारतीय विद्यार्थियों को सही समय पर सही परामर्श देने के प्रयास शुरू करना होगा ताकि वे अन्तरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मनचाही स्थिति हासिल कर सकें.”

सर्वेक्षण में शामिल तकरीबन 33 फीसदी कम्पनियां प्रतिभा के विकास में निवेश कर रही हैं. वहीं, 38 फीसदी छात्रों ने बताया कि टेकनॉलोजी करियर विकल्पों के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. 48 फीसदी शिक्षकों के लिए करियर से जुड़े फैसले अभिभावकों और छात्रों के लिए तनाव का कारण होते हैं. फेडरेशन ऑफ इण्डियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के सहयोग से भारत एवं दुनिया के अन्य प्रमुख स्थानों पर किए गए इस सर्वेक्षण में ‘हाई स्कूल एवं काउन्सलर्स’, ‘विद्यार्थियों’, ‘विश्वविद्यालयों एवं विश्वस्तरीय अकादमिक संस्थानों’ तथा ‘उद्योग जगत के दिग्गजों’ की राय ली गई.
सर्वेक्षण के निष्कर्षो से पता चलता है कि आज भी भारतीय विद्यार्थी पारम्परिक पाठ्यक्रमों को ही चुनते हैं क्योंकि भारत में करियर एवं कॉलेज काउन्सलिंग के लिए अन्तरराष्ट्रीय मानदण्डों के समकक्ष काउन्सलिंग प्रथाओं का अभाव है. ऐसा विशेष रूप से जागरुकता एवं अवसरों की कमी के कारण है. इसमें बताया गया कि 40 फीसदी छात्रों का कहना है कि वे सुरक्षित विषय जैसे विज्ञान, टेकनॉलोजी, इंजीनियरिंग और गणित के विकल्प चुनना चाहते हैं, 22 फीसदी छात्रों ने आर्ट, एंटरटेनमेन्ट एवं स्पोर्ट्स को प्राथमिकता दी, वहीं 18 फीसदी छात्रों ने बिजनेस एवं फाइनेन्स को तथा 17 फीसदी छात्रों ने हेल्थ एण्ड मेडिसिन को अपना पसंदीदा विषय बताया.

साथ ही अन्तरराष्ट्रीय बाजार में छात्रों का पंजीकरण तेजी से बढ़ रहा है. विदेशों में पढ़ाई की बात करें तो 45 फीसदी छात्र अमेरिका को, 14 फीसदी कनाडा को, 13 फीसदी ब्रिटेन को, 10 फीसदी ऑस्ट्रेलिया को और 8 फीसदी दक्षिण-पूर्वी एशिया को तथा 7 फीसदी छात्र यूरोप को प्राथमिकता दे रहे हैं.

फेडरेशन ऑफ इण्डियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के सहायक महानिदेशक शोभा मिश्रा घोष ने कहा, “आज की डिजिटल दुनिया में कॉलेज से करियर की ओर छात्र का स्थानान्तरण उसकी व्यक्तिगत रुचि पर निर्भर करता है. उद्योग जगत सेमिनारों और विभिन्न मंचों के माध्यम से छात्रों को करियर के विभिन्न विकल्पों के बारे में जानकारी दे रहा है.”

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से इनपुट

Source: //www.thehindu.com/education/make-informed-choices/article28973741.ece

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